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Random Thought #6: The Rear Window Approach

20 October 2020, 02:58 PM

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शिकायत...

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#एक व्यथा दिल की ओर शिकायत अपनों से और खुद से...

"कब ये मालूम था हमको यूं उम्र गुजरेगी।
जिन्दगी यू खफा सी बेवाफा सी गुजरेगी।।
दिले नादान तू अपने तराने छोड़ दे वरना।
तमाम उम्र तेरी बर्बादियों में गुजरेगी।। (राष्ट्रवादियों का हस्र देखता हूं तो)
तेरी ये कमनसीबी खाब सजाए तूने।(देश और धर्म की उन्नति के)
ख्वाब को छोड़ दे वरना सजा ही निकलेगी।।

(और हिन्दू कौम पर तंज है...)

रक्त पानी हो गया रे रक्त पानी हो गया।
इन द्वेष के मारे हुओं का जोश पानी हो गया।
फोलाद की तो थीं कभी(भुजाएं)
अब तो बनी हैं मोम की। क्योकर लगा दे देश पर बाजी ये अपनी जान की।।
जिनका लहू हो पानी वे बहा दें माटी पे इसको।
हमको तो लगता है डर।
 देखो हमें मारना नहीं।।(लानत हैं ऐसी जवानी पर)

#
क्या हो गया दोस्तो इस हिंदू लड़ाकों को जो कहते थे 
"मौत और जिंदगी है दुनियां का सब तमाशा फरमान कृष्ण का था अर्जुन को बीच रण में।"

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समझौता सिंह

 

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