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अतीत द्रष्टि

I am a Woman

Random Thought #6: The Rear Window Approach

20 October 2020, 02:47 PM

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अतीत द्रष्टि

अतीत द्रष्टि

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ये कैसी हवा चली ये क्या तूफां उठा ।     
ये क्या उजड गया जो था दिखायी दिया।।1
किसी के अरमान थे किसी का सम्मन था।
किसी का प्यार था किसी की लाज थी।।2
ये किसके स्वप्न थे किसका अतीत था ।
धूल भरी आंधी में सब धूमिल सा था।।3
साफ जो चमका था बस एक र्दद था।
निकली हुई आह थी बिखरे हुए दिल से ।।4
सब तो उजड गया सब तो बिखर गया।
हरियाले चमन के बस रूख कंकाल है।।5
.....................................................................................................................................             
-समझौता सिंह-

 

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