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एक औरत हूं...

अतीत द्रष्टि

I am a Woman

Random Thought #6: The Rear Window Approach

20 October 2020, 03:08 PM

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एक औरत हूं...

एक औरत हूं...

  • 21

एक औरत हूं मैं,
तुम्हारी तरह मेरे पास भी दिल हैं।
नुमाइश में रखा सामान नहीं हूं,
एक इंसान हूं मैं।
कभी कहते हो रंग गोरा नहीं,
कभी कहते हो छरहरी नहीं।
मेरी सुन्दरता के तुमने बनाए है,
कई मानक, सब पर मैं खड़ी नहीं।
किसी एक में भी कम हूं,
तो वो भी मेरी कमी है।
रंग सांवला हैं मेरा,
सांवले तो कृष्ण भी हैं।
क्यों उनकी तुम पूजा करते हो,
और मेरा तिरस्कार।
एक औरत हूं मैं,
मेरे पास भी एक दिल हैं।

 

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Written by: Nidhi Kala. A Lecturer in college, Nidhi is a sensitive-to-nature-and-people kind of a person and in-closet poet.

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