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बंद खिड़कियों को खोल के

ज़िन्दगी तू भी एक शिक्षिका है

Rain! Rain! Don’t Go Again

A Storm Is Rising

6 August 2020, 01:14 AM

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डर लगता है…

डर लगता है…

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पंख तो है पर उन्हें पसार कर,

उड़ने से डर लगता है .

यूँ तो ज़िन्दगी रुकी नहीं पर,

आगे बढ़ने से डर लगता है.

राहें है, है मंज़िल भी नज़र में,

है अपनी हर कोशिश भी असर में.

हिम्मत है पहाड़ नापने की पर,

चढ़ने से डर लगता है.

ऊंची-नीची लहरें अपनी कोई साथी नहीं.

पर ऐसी कोई लहर नहीं, जो आके जाती नहीं.

मछलियों से नाता है पर,

तरने से डर लगता है.

उलटी-पुल्टी पथरीली सी ज़िन्दगी की डगर है,

दोस्तों का साया भी है, दुश्मनो का भी कहर  है.

दिल संग हिम्मत का हथियार है पर,

लड़ने से डर लगता है.

उड़ते है हम फिर भी और हर पहाड़ चढ़ते है,

तैरते है हर दरिया में, हर सीमा पे लड़ते है.

आगे बढ़ते जाते है क्यूंकि

डरने से डर लगता है.

रुकते नहीं कभी कि डर से

हार जाने से डर लगता है.

Fear the things that are yet to come, admit your fear and when you are ready…face your fears.

Just don’t give in to them.

Love,

Lipi Gupta

 

Copyright Lipi Gupta 8/11/2017, 8:07 PM IST


 

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Comments (1)

  1. Rakesh mishra - 27 Apr 2020

    Bahut khoob. Lipi ji aapki poem bhaut sunder h..

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