Latest Blogs

Right Here For You

तुम क्या खुद को ख़ुदा समझते हो?

Virtue

My First Voting Experience

Grown Up Birthdays

20 January 2021, 08:40 AM

31°c , India

बहुत कम....

बहुत कम....

  • 1.3K

लोग तो बहुत मिलते है,
लेकिन साथी बहुत कम....


यूँ तो काफिला होता हैं साथ चलते समय,
पर हर मोड़ पर साथ देने वाले बहुत कम...


अच्छी अच्छी मंजिले गिर जाती हैं तुफानो में,
पर ऐसे तुफानो में सहारा बनकर, उठाने वाले बहुत कम....


हर किसी की होती हैं मकसद ऐ मंजिल, पर मुसकिलात आती हैं जब,
ऐसी मुसकिल घड़ियों में खुद सीढ़ी बन जाने वाले बहुत कम....


काँटो से भरी होती है राह,पैर पीछे लौटने लगते हैं जब,
तब ख़ुद को काँटो पर बिछाने वाले बहुत कम....

...........................................................................................

Written by: Meenu Bhati

Working as Assistant Professor, Meenu Bhati is a closet poet and finds love in everything. She writes about emotions through her poetry.

Share this artical

Leave Comment