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एक बार तो मुस्कुरा दो

कहां गए वो दिन,

3 July 2020, 04:04 PM

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इंसानियत निभाते है

इंसानियत निभाते है

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है सफ़र में कुछ साथी अपने,
कुछ दुर तक साथ निभाते है।।

उनकी हताश-निराश निगाहों को,
फिर से एक उम्मिद दिखलाते है।।

छाले पड़ चुके है जिन पैरों को,
उन जख्मों का मरहम बन जाते है।।

इतना मुश्किल नही कर्तव्य-पथ,
इंसान है, इंसानियत निभाते है

चंद सिक्कों की बात है,
भूखों को भोजन करवाते है।।

जो पैदल भटक रहा है सड़को पर,
हो मुमकिन तो घर तक छोड़ आते है।।

इतना मुश्किल नही कर्तव्य-पथ,
इंसान है, इंसानियत निभाते है।।

 

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लेखक परिचय;- नितिन, 23, राजस्थान के डूंगरपुर जिले से है। अनछुए पहलुओं पर लिखना और उन्हें समाज के सामने लाना नितिन के लेखन का मूल उद्देश्य है।

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उदयपुर के एक निजी इंस्टिट्यूट से नर्सिंग में डिप्लोमा करने के बाद नितिन ने लेखन की तरफ अपना पहला कदम बढ़ाया और वर्ष 2017 में उनकी पहली पुस्तक प्रकाशित हुई। और तबसे उनकी दो पुस्तकें अंग्रेजी में और एक कविता संग्रह हिंदी में प्रकाशित हुए है, जिनके लिए उन्हें भरपूर सरहहना मिल रही है।

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Comments (1)

  1. Sarvesh R - 28 May 2020

    Bahut gehrai waali baat itne simple words mein kahi hai apne. Bahut sunder.

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