Latest Blogs

Ode of the fallen

Anniversaries...

प्रतीक्षा

एक बार तो मुस्कुरा दो

कहां गए वो दिन,

3 July 2020, 04:44 PM

31°c , India

एक बार तो मुस्कुरा दो

एक बार तो मुस्कुरा दो

  • 13

सुबह की भागमभाग
वाली चाय के साथ।
सरसरी निगाह में,
अख़बार को पलटना।
घर से निकलना 
दफ्तर के लिए।
बस और रेल के रोज,
वहीं धक्के खाने के लिए।
दिन-भर उलझे,
रहना फाइलों में।
और रोज़मर्रा की,
शाम की थकान में।
बात-बात में,
तुम्हारा झल्ला जाना।
या कभी चुप्पी,
साध के बैठ जाना।
अपने शब्दों को,
आवाज़ तो दो।
तुम रूठते बहुत हो,
एक बार तो मुस्कुरा दो।
यूं तो वक़्त ही, 
कहां है तुम्हे।
एक अरसा हो गया,
एक बार तो मुस्कुरा दो।

 

...............................................................................................................

Written by: Nidhi Kala. A Lecturer in college, Nidhi is a sensitive-to-nature-and-people kind of a person and in-closet poet.

Share this artical

Leave Comment